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बदल जाना किसी का इतना बुरा नहीं है
उसके समझ आने, जितना बुरा नहीं है
बकरे ने कसाई को समझ लिया ख़ुदा
यही यकीन बुरा है, ठगना बुरा नहीं है
जितना समझे रहे थे, उतना नहीं था अच्छा
जितना समझ रहे हो, उतना बुरा नहीं है
बस यही एक तजरबा, हमें कई मर्तबा हुआ
कि मुझसे है बुरा वो, वरना बुरा नहीं है
सजे तो लगे परी-सी, डरता हूँ कि वैसे
ग़रीब की बेटी का, सजना बुरा नही है
ऐसे जल रहा हूँ, गल रहा हूँ पिघल रहा हूँ
हर वक़्त जलन बुरी है, जलना बुरा नहीं है
माना बुरे हैं हम फ़क़ीर, कुछ अपनी भी कहो
बुरे नहीं हो तुम, कि ज़माना बुरा नहीं है?


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फेसबुक : चेहरों की किताब

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