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इस ज़मीन को खुद में बसाने लगा है.
वो छोटा बच्चा मिटटी खाने लगा है.

कुछ लोग घर को रेत कर गए थे,
वो पागल रेत से घर बनाने लगा है.

बुश - लादेन, इज़रायल -फलस्तीन हमसफ़र हैं,
वो अख़बारी काग़ज़ के जहाज़ उड़ाने लगा है.

इक तरफ इंसान बंट रहे हैं ज़ात मज़हब में,
इक तरफ वो आटे में बेसन मिलाने लगा है.

गिरो, उठो, धूल झाड़ो, फिर बढ़ो,
वो हमें चलने का सलीका सिखाने लगा है.

कहीं बचपन को लग जाए तजर्बे की नज़र,
यह फ़िक़्र फ़क़ीर मुझे सताने लगा है.

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फेसबुक : चेहरों की किताब

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