Skip to main content

बच्चा


मेरे ख़्वाब के क़द का
एक छोटा सा बच्चा था
सोता-जगता था मेरे संग
मेरी आँखों में ही बसता था
ग़ुमी राहों का मुसाफ़िर था
रस्तों को राह दिखाता था
अक्सर नक़्शे पे क़लम से
अपनी दुनिया बनाता था
क़लम को बनाके तलवार
हर सरहद मिटाता था
सोशल इंजीनियर था वो
हदें मिटाना उसे आता था
कभी नक़्शे फाड़ पहाड़ी से
पुर्ज़ा - पुर्ज़ा उड़ाता था
गरीबों में वो रोबिन हुड
दुनिया बाँट के आता था
ग्लोब गोल नहीं, बस बॉल था
पैरों में दुनिया रखता था
एटलस के पन्ने फाड़कर
नाव बनाया करता था
पर नाव, छीन न ले कोई
खौफ में भी रहता था
सबसे बचाके, सबसे छुपाके
दिलवाली जेब में रखता था
बेख़ौफ़ भले न हो, बेफ़िक़्र था वो
कब किसकी परवाह करता था
जिस दुनिया में रहता था वो
उस दुनिया को जेब में रखता था
मेरे ख़्वाब के क़द का
एक छोटा सा बच्चा था


Comments

Popular posts from this blog

हैं ग़लत भी और जाना रूठ भी सच तभी तो लग रहा है झूठ भी बोझ कब माँ –बाप हैं औलाद पर घोंसला थामे खड़ा है ठूंठ भी खींचना ही टूटने की थी वजह इश्क़ चाहे है ज़रा सी छूट भी दे ज़हर उसने मुझे कुछ यूं कहा प्यास पर भारी है बस इक घूँट भी
सुनो! मैं बादलों के बादलों से लब लड़ाऊंगा यही ज़िद है कि अब आब से मैं आग पाऊंगा मुझे तुम छोड़ के जो जा रहे हो तो चलो जाओ करूंगा याद ना तुमको, मगर मैं याद आऊंगा थमाया हाथ उसके एकदिन शफ्फाक आईना मिरा वादा था उससे चांद हाथों पर-सजाऊंगा ज़रा देखूं कि अब भी याद आता हूं उसे मैं क्या कि अपनी मौत की अफवाह यारों मैं उड़ाऊंगा लड़ाऊं आंख से मैं आंख, वादा था मिरा उसको अजी पानी नहीं जानां, मैं मय में मय मिलाऊंगा बदन शीशे का तेरा और संगदिल भी तुही जानां तुझे तुझसे बचाऊं तो भला कैसे बचाऊंगा
मेरी सूरत से वो इस क़दर डरता है. कि न आइना देखता है, न संवरता है. गवाह हैं उसके पलकों पे मेरे आंसू, वो अब भी याद मुझे करता है. दूर जाकर भी भाग नहीं सकता मुझसे, अक्सर अपने दिल में मुझे ढूँढा करता है. ख़ामोश कब रहा है वो मुझसे, तन्हाई में मुझसे ही बातें करता है. मेरी मौजूदगी का एहसास उसे पल पल है, बाहों में ख़ुद को यूँही नहीं भरता है. मेरे लम्स में लिपटे अपने हाथों में, चाँद सी सूरत को थामा करता है. जी लेगा वो मेरे बिन फ़कीर, सोचकर, कितनी बार वो मरता है.