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मैंने क़ब्र पर मकान बनाया है

चारदीवारी ने मिलकर
छत को कांधा लगाया है
मैंने क़ब्र पर मकान बनाया है
अपनी हर ख़्वाहिश को
बुनियाद तले दफनाया है
मैंने क़ब्र पर मकान बनाया है
मेरे बाहर अंदर की
दीवार बनेंगी दीवारें
मेरे बदतर बेहतर की
दीवार बनेंगी दीवारें
मेरे घर और दफ्तर की
दीवार बनेंगी दीवारें
मेरे सत्रह - सत्तर की
दीवार बनेंगी दीवारें
बेबस ईमान को मैंने
दीवारों में चुनवाया है
मैंने क़ब्र पर मकान बनाया है
आड़े तिरछे तरक़ीबों से
सीधी खड़ी हैं दीवारें
किसी की कमज़ोरी की ईंटों से
मज़बूत खड़ी हैं दीवारें
मेरे मन के बौनेपन से
ऊंची खड़ी हैं दीवारें
कंट्रीब्यूशन है हर मज़लूम का
सिर्फ अपना नाम लिखवाया है
मैंने क़ब्र पर मकान बनाया है

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