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तुम रूठ जाओ, तुम्हें मनाने का लुत्फ़ आता है.
कि तुम्हें यूं ही खो के पाने का लुत्फ़ आता है.

बगैर 'जाँ'" के भी जीते हैं कुछ दिन,
हथेली पे दही जमाने का लुत्फ़ आता है.

खुद से करें वादा, देखेंगे नहीं तुमको
देखके तुमको वादा भूल जाने का लुत्फ़ आता है.

वफ़ा के CONTRACT का कर लें RENEWAL
बेवफा होकर भी वफ़ा निभाने का लुत्फ़ आता है.

हर लम्हा खुद से बोलें, तुम्हें याद नहीं करते
अजी दिल को बहलाने का लुत्फ़ आता है.

जलती रही शम्मा, कि परवाने को है जलाना
कि जल - जलकर जलाने का लुत्फ़ आता है.

यूंही इकदिन ख़ुदको, फिर कर देंगे तेरे हवाले
ठोकरें खाकर घर लौट आने का लुत्फ़ आता है.

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मेरी सूरत से वो इस क़दर डरता है. कि न आइना देखता है, न संवरता है. गवाह हैं उसके पलकों पे मेरे आंसू, वो अब भी याद मुझे करता है. दूर जाकर भी भाग नहीं सकता मुझसे, अक्सर अपने दिल में मुझे ढूँढा करता है. ख़ामोश कब रहा है वो मुझसे, तन्हाई में मुझसे ही बातें करता है. मेरी मौजूदगी का एहसास उसे पल पल है, बाहों में ख़ुद को यूँही नहीं भरता है. मेरे लम्स में लिपटे अपने हाथों में, चाँद सी सूरत को थामा करता है. जी लेगा वो मेरे बिन फ़कीर, सोचकर, कितनी बार वो मरता है.

मदारी

अरे! हे मदारी! रे मदारी! रे मदारी! हो! तेरा पिटारा, है जग सारा, दुनियादारी हो तेरे इशारे का सम्मान करें ख़ुद हनुमान तुम मांगो भीख तेरे कब्ज़े में भगवान ईश का करतब इंसान और ईश इंसानी कलाकारी हो   हे मदारी! रे मदारी! रे मदारी! हो! आस्तीन सा एक पिटारा सांप हम जै सा तुम्हारा सर पटके बार बार विष उगलने को तैयार न ज़हर उगल आज मत बन रे समाज काटने- कटने की ये बीमारी हो हे मदारी! रे मदारी! रे मदारी! हो! तेरे जमूरे- आधे अधूरे भूखे - नंगे , हर हर गंगे हाथसफाई के उस्ताद पर लगे कुछ न हाथ जीने के लिए जान लगाएं ज़ख्म से ज़्यादा कुछ न पाएं हवा खाएं साएं – साएं बचपन के सर चढ़ गयी ज़िम्मेदारी हो हे मदारी! रे मदारी! रे मदारी! हो!
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