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CREATIVITY

ऑफिस के AC कमरे में
सोने के पिंजरें में
चूरण बेंच रहे हैं.

ATTITUDE के साथ
CREATIVITY की चिता पर
रोटी सेंक रहे हैं.

SELF - MADE COCOON के अन्दर
हम - से कुछ कूप - मंड़ूप
... गट गट घमंड
पी रहे हैं...
मूत रहे हैं.

ख़ुद को सरापा जलाकर
जो थोडा सा राख पैदा हुआ
उसकी रौशनी में इतराकर
सूरज पर थूक रहे हैं.

और बाहर.....
एक मदमस्त फकीर
लांघकर हर लकीर
लिख गया दीवार पर:

"आज रात अमावास होगा.
चाँद को रख लिया है दिल में
छत से उतारकर........"

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मदारी

अरे! हे मदारी! रे मदारी! रे मदारी! हो! तेरा पिटारा, है जग सारा, दुनियादारी हो तेरे इशारे का सम्मान करें ख़ुद हनुमान तुम मांगो भीख तेरे कब्ज़े में भगवान ईश का करतब इंसान और ईश इंसानी कलाकारी हो   हे मदारी! रे मदारी! रे मदारी! हो! आस्तीन सा एक पिटारा सांप हम जै सा तुम्हारा सर पटके बार बार विष उगलने को तैयार न ज़हर उगल आज मत बन रे समाज काटने- कटने की ये बीमारी हो हे मदारी! रे मदारी! रे मदारी! हो! तेरे जमूरे- आधे अधूरे भूखे - नंगे , हर हर गंगे हाथसफाई के उस्ताद पर लगे कुछ न हाथ जीने के लिए जान लगाएं ज़ख्म से ज़्यादा कुछ न पाएं हवा खाएं साएं – साएं बचपन के सर चढ़ गयी ज़िम्मेदारी हो हे मदारी! रे मदारी! रे मदारी! हो!
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